अगर पूर्व की ओर है घर का मेन गेट तो अपनाएं ये वास्तु टिप्स श्री गणेशाय नम: (वास्तु अंकित 8789364798)

अगर पूर्व की ओर है घर का मेन गेट तो अपनाएं ये वास्तु टिप्स
लंबी और थकाऊ प्रक्रिया है, जिसमें वास्तु शास्त्र की भी अहम भूमिका है. हालांकि वास्तु शास्त्र के जानकार मानते हैं कि सभी दिशाएं अच्छी होती हैं और इस मामले में काफी भ्रम हैं. उदाहरण के तौर पर, दक्षिण और पश्चिम की ओर जो संपत्ति होती है, वह मालिकों के लिए कम शुभ मानी जाती है जबकि पूर्व की ओर जिस प्रॉपर्टी का मुंह होता है, वह उसमें रहने वालों के लिए भाग्यशाली होती है. कई बार लोग वास्तु शास्त्र के अनुकूल घर के लिए ज्यादा पैसे देने के लिए भी तैयार रहते हैं. लेकिन क्या यह इस लायक है? चलिए जानते हैं. पूर्व की ओर मुंह वाला घर क्या है? अगर आप घर के अंदर हैं और घर के मुख्य द्वार पर खड़े हैं और घर से निकलते वक्त जिस दिशा में आपका मुख है. अगर घर से निकलते वक्त आपका मुख पूर्व की ओर है तो आपका ईस्ट-फेसिंग हाउस है. क्या पूर्व की ओर मुंह वाले घर अच्छे होते हैं? ऐसा माना जाता है कि जो घर पूर्व दिशा की ओर होते हैं, वे भाग्यशाली होते हैं. जो घर पूर्व दिशा में बड़े और निचले स्तर पर होते हैं, वे ज्यादा सौभाग्यशाली होते हैं. ईस्ट-फेसिंग प्रॉपर्टी के लिए वास्तु शास्त्र वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के मुताबिक, ईस्ट-फेसिंग प्रॉपर्टीज बिल्डिंग्स और मल्टी स्टोरी अपार्टमेंट्स के लिए अच्छी मानी जाती हैं. हालांकि स्वतंत्र घर और बंगलों के लिए यह दिशा अच्छी नहीं मानी जाती. साथ ही ऐसे वास्तु शास्त्र के कई नियम, गाइडलाइंस व सिद्धांत हैं, जिन्हें ईस्ट-फेसिंग प्रॉपर्टी के मामले में फॉलो करना पड़ता है. पूर्वी की ओर मेन गेट के लिए वास्तु: अगर आपके घर का मुंह पूर्व की ओर है तो मुख्य द्वारा लगाते वक्त थोड़ी सावधानी बरतें. हमेशा सुनिश्चित करें कि एंट्रेंस हमेशा मध्य से हो, साउथ-ईस्ट या नॉर्थ ईस्ट से नहीं क्योंकि ये दोनों ही कोने ईस्ट-फेसिंग प्रॉपर्टी में मेन डोर लगाते वक्त वास्तु के मुताबिक अशुभ होते हैं. अगर आपकी एंट्रेंस नॉर्थ ईस्ट कॉर्नर में है तो सुनिश्चित करें कि मेन डोर नॉर्थ ईस्ट कॉर्नर को न छुए. इसके लिए आप 6 इंच (1/2 फुट) का गैप दीवारों और मुख्य द्वार के बीच छुड़वा सकते हैं. अगर आपके घर की एंट्रेंस साउथ-ईस्ट फेसिंग है तो वास्तु दोष को मिटाने के लिए इन उपायों को अपनाएं. -तीन वास्तु पिरामिड रखें, एक दरवाजे के हर तरफ और तीसरा मुख्य द्वार के ऊपर सेंटर में. -आप ओम, स्वास्तिक या त्रिशूल भी गेट के दोनों साइड लगा सकते हैं. -घर से नकारात्मक ऊर्जा खत्म करने के लिए आप सिद्ध शुक्र यंत्र भी लगा सकते हैं. -इसके अलावा आप सिद्ध वास्तु कलश का भी इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि कोने के इस हिस्से से पैदा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाया जा सके. ईस्ट-फेसिंग हाउस में क्या न करें: उत्तर और पूर्व दिशाओं में दीवारें, दक्षिण और पश्चिम की तुलना में थोड़ी छोटी और पतली होनी चाहिए. रसोईघर दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम दिशा में बनानी चाहिए. अपनी रसोई की योजना इस तरह से बनाएं कि आप खाना बनाते समय पूर्व (दक्षिण-पूर्व रसोई में) या पश्चिम (उत्तर-पश्चिम रसोई में) की ओर रहें. उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा घर और लिविंग रूम बहुत शुभ माना जाता है. आप उत्तर-पश्चिम दिशा में गेस्ट रूम बना सकते हैं. ऐसा प्लॉट जो दक्षिण से उत्तर की ओर ढलान वाला हो, उसे अच्छा माना जाता है. दक्षिण-पश्चिम दिशा में मास्टर बेडरूम सबसे अच्छा माना जाता है. उत्तर-पूर्व कोने में कोई बेडरूम, शौचालय और सेप्टिक टैंक नहीं होना चाहिए. उत्तर-पूर्व के कोने में रसोई नहीं होनी चाहिए. घर के उत्तरी और पूर्वी हिस्से में कोई बड़ा पेड़ नहीं होना चाहिए. उत्तर और उत्तर-पूर्व कोने में कोई अव्यवस्था, गंदगी, डस्टबिन आदि नहीं होनी चाहिए. घर के पूर्वी और उत्तरी हिस्से में अधिक खुली जगह छोड़ें. प्लॉट के दक्षिणी और पश्चिमी तरफ की दीवार ऊंची होनी चाहिए. ऐसी संपत्ति खरीदने से बचें, जो दक्षिण या पश्चिम दिशा में जमीन से जुड़ी है. ऐसी प्रॉपर्टी पर विचार करें, जिसके पास उत्तरी दिशा में एक प्लॉट जुड़ा हो, क्योंकि यह भाग्यशाली माना जाता है और समृद्धि और भाग्य लाता है. अगर घर में कोई छात्र है, तो उत्तर-पूर्व क्षेत्र में एक क्रिस्टल ग्लोब रखें. ऊर्जात्मक वाइब्स को बढ़ाने के लिए सप्ताह में दो बार पहाड़ी नमक से घर को शुद्ध करें. (वास्तु अंकित 8789364798)

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